जगदलपुर में किसानों को मिला बड़ा तोहफा! कंद फसल परियोजना ने बांटे सब्जी बीज, अमरूद-मुनगा पौधे और तिरपाल
![]() |
| कंद फसल अनुसंधान परियोजना प्रभारी डॉ. पद्माक्षी ठाकुर जगदलपुर के कुम्हरावण्ड में किसानों को कंदीय फसलों की उन्नत किस्मों एवं उत्पादन तकनीक की जानकारी देते हुए। |
30 से अधिक किसानों ने लिया भाग
इस प्रक्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम में ग्राम पोटानार, विकासखंड तोकापाल से 30 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ए.के. ठाकुर, सह-संचालक अनुसंधान, परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, जगदलपुर उपस्थित रहे।
कंद फसल अपनाने की दी सलाह
डॉ. ए.के. ठाकुर ने किसानों को कंदीय फसलों की खेती के फायदे बताते हुए कहा कि कंद वर्गीय फसलें कम लागत में अधिक मुनाफा देती हैं। उन्होंने किसानों को कंद फसलों को अपनाने का सुझाव दिया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
उन्नत तकनीक और किस्मों की दी जानकारी
कंद फसल अनुसंधान परियोजना प्रभारी डॉ. पद्माक्षी ठाकुर ने किसानों को कंद वर्गीय प्रक्षेत्र का भ्रमण करवाते हुए अलग-अलग कंदीय फसलों के उत्पादन तकनीक एवं किस्मों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को खेती की उन्नत तकनीक अपनाने की सलाह दी, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में बढ़ोतरी हो सके।
भंडारण और लघु कंद फसलों की जानकारी
इसके अलावा डॉ. गुंजा ठाकुर ने किसानों को कंद फसल के भंडारण की जानकारी के साथ-साथ लघु वर्गीय कंद फसलों के उत्पादन की तकनीक भी बताई। किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
किसानों को मिली ये सामग्री
प्रक्षेत्र भ्रमण के उपरांत किसानों को सब्जी बीज, कीटनाशक, मुनगा पौधा, अमरूद पौधा के साथ-साथ तिरपाल (तालपत्री) भी वितरित किया गया। इस सामग्री वितरण से किसानों के चेहरे पर खुशी देखी गई और उन्होंने इस पहल के लिए परियोजना टीम का आभार व्यक्त किया।
किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में सार्थक कदम
यह कार्यक्रम किसानों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराता है, जिससे वे अपने खेतों में उन्नत खेती कर सकें। कंद फसल परियोजना के इस प्रयास से क्षेत्र के अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को आत्मनिर्भर बनने और उनकी आय में वृद्धि की दिशा में एक सार्थक पहल मानी जा रही है।
