राज्योत्सव पर बस्तर को ऐतिहासिक सौगात! 1 नवंबर से इंद्रावती टाइगर रिजर्व में शुरू होगी जंगल सफारी, बाघ-वन भैंसों को करीब से देख सकेंगे पर्यटक
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| छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप |
तीन दशकों के संघर्ष के बाद प्रकृति की ओर वापसी
बस्तर की धरती, जो कभी दशकों तक वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित रही, अब एक नई सुबह की गवाह बन रही है। इस कठिन दौर के अंत के बाद, इंद्रावती टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है। यहां के शांत जंगलों में बाघों की आहट, दुर्लभ राजकीय पशु वन भैंसों की विरासत, गिद्धों की ऊंची उड़ान और अनगिनत जीवों की दुनिया बसती है, जिसे अब पर्यटक करीब से देख सकेंगे।
रोजगार और आत्मनिर्भरता के खुलेंगे नए द्वार
यह जंगल सफारी केवल वन भ्रमण का साधन नहीं है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते तलाशने की एक ठोस शुरुआत है। इस ईको-टूरिज्म पहल के माध्यम से स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड और सफारी वाहन संचालक के रूप में सीधा रोजगार मिलेगा। 'होम स्टे' के जरिए ग्रामीण परिवारों को पर्यटकों के आतिथ्य से नई आजीविका प्राप्त होगी। स्थानीय महिलाओं द्वारा बनाए जाने वाले पारंपरिक व्यंजनों और बस्तर के कारीगरों के बेजोड़ हस्तशिल्प व उत्पादों को एक नया बाजार और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
विशेष प्रशिक्षण और पर्यटकों के लिए बेहतरीन सुविधाएं
सफारी के रोमांच को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए वर्तमान में 4 जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही सफारी के दौरान पर्यटकों के लिए टूर गाइड और चाय-नाश्ते (स्नैक्स) की भी बेहतरीन सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस पूरी व्यवस्था की कमान पूरी तरह से स्थानीय ग्रामीणों के हाथों में सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि सफारी संचालन, बेहतरीन आतिथ्य और प्रकृति से जुड़ी सटीक जानकारी देने के लिए इन स्थानीय युवाओं को विशेष रूप से 'कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान' भेजकर प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे एक कुशल गाइड और मेजबान के रूप में पर्यटकों को विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान कर सकें।
बस्तर की धड़कन है इंद्रावती
इंद्रावती टाइगर रिजर्व सिर्फ एक जंगल नहीं है, यह बस्तर की धड़कन और बस्तर की वास्तविक पहचान है। यह अनमोल विरासत अब भविष्य के जिम्मेदार पर्यटन की नींव रखने जा रही है। इस सफारी के शुरू होने से न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर बस्तर मजबूती से उभरेगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के विकास, शांति और प्रकृति संरक्षण का एक शानदार मॉडल बनकर सामने आएगा।
