शिक्षा विभाग के तुगलकी फरमानों से परेशान शिक्षक, जाकेश साहू बोले- 'संगठन एकता नहीं तो नहीं होगा समाधान'
रायपुर, 25 जून 2026 — शिक्षा विभाग में बढ़ती ऑनलाइन व्यवस्था, नित नए आदेश और अव्यवहारिक निर्देशों ने शिक्षकों का जीवन मुश्किल कर दिया है। वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन की मांग, क्रमोन्नति, विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) एप, सरकारी एप्स की अधिकता और मोबाइल पर ही दिनभर काम करने को मजबूर हो चुके शिक्षक अब 'डाटा एंट्री ऑपरेटर' बनकर रह गए हैं।इन समस्याओं की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के संस्थापक जाकेश साहू ने राज्य के शिक्षक नेताओं और संगठनों को ठहराई है। उनका कहना है कि संगठनों के टुकड़ों में बंटने के कारण शासन शिक्षकों की एक नहीं सुन रहा है।
📱 शिक्षक बने डाटा एंट्री ऑपरेटर
जाकेश साहू ने कहा कि "शिक्षक अब शिक्षक नहीं रहा, वह डाटा एंट्री ऑपरेटर बनकर रह गया है।" राज्य कार्यालय से जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकुल समन्वयक होते हुए अंत में स्कूल तक आदेश आते हैं और हर बार "तत्काल जानकारी भेजें" का दबाव होता है। शिक्षक को अपना मूल काम छोड़कर यह आदेश मानने और डाक बनाने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे वह बच्चों को ठीक से पढ़ा नहीं पा रहा।
📲 विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) एप की समस्या
इस वर्ष राज्य शासन द्वारा शिक्षकों की प्रतिदिन उपस्थिति के लिए विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) एप लाया गया है। जिसमें शिक्षक प्रतिदिन स्कूल में उपस्थित होकर अपने मोबाइल में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करते हैं। लेकिन प्रदेश के अधिकांश जिलों में मोबाइल टावर नहीं हैं, या नेटवर्क सही नहीं मिल पाता। इसके कारण शिक्षकों को पढ़ाना छोड़कर मोबाइल लेकर टावर वाले स्थानों पर इधर-उधर भटकना पड़ता है।
☀️ भीषण गर्मी में स्कूल संचालन पर उठाए सवाल
साहू ने भीषण गर्मी के आकलन के बगैर 16 जून से स्कूल संचालित करने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भयावह गर्मी, तेज धूप एवं उमस के कारण बच्चे और शिक्षक दोनों ठीक से बैठ नहीं पा रहे हैं और उनकी बार-बार तबीयत खराब हो रही है।
🗣️ संगठनों की एकता पर सवाल
जाकेश साहू ने सबसे बड़ी समस्या शिक्षक संगठनों में एकता न होना बताया। उन्होंने कहा कि सभी संगठन टुकड़ों में बंटे हैं और अपनी-अपनी नेतागिरी कर रहे हैं। इसी कारण शासन उनकी बात नहीं सुनती। उन्होंने कहा कि यदि सभी संगठन एक मंच पर आकर लड़ें, तो सरकार पर दबाव बनेगा और अव्यवहारिक तुगलकी फरमान बंद होंगे।
"यदि सभी संगठन एक मंच पर आते हैं और आंदोलन का ऐलान करते हैं तो निश्चित रूप से प्रदेश के आम शिक्षक उक्त साझा मंच के साथ होंगे।"
📌 प्रमुख मांगें
✅ वेतन विसंगति दूर की जाए।
✅ प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर पुरानी पेंशन बहाल हो।
✅ क्रमोन्नति वेतन सहित समस्त लाभ मिले।
✅ युक्त-युक्तिकरण की पीड़ा समाप्त हो।
✅ वीएसके एप व अन्य ऑनलाइन कार्यों की अधिकता कम हो।
✅ गर्मी को देखते हुए स्कूलों की समय-सारिणी में संशोधन हो।
