बारिश में भींगते थे, अब पक्के घर में रहकर मिली चैन – मसूराम सेठिया के परिवार ने बचत से बनाए दो कमरे और, पढ़ें पूरी कहानी
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| "बारिश में भीगते-बिलखते बीते साल, आज इस दरवाजे पर खड़े होकर मसूराम सेठिया की आँखों में वो सुकून है, जो सिर्फ अपना पक्का घर देता है। PM आवास योजना ने दी छत, तो इन्होंने अपनी मेहनत से जोड़े दो कमरे।" |
कहते हैं, सपने देखने से ही वो साकार होते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के छोटे से गाँव छापर भानपुरी में रहने वाले मसूराम सेठिया के साथ।
एक छोटी सी खेती और मजदूरी पर पलने वाले इस परिवार के लिए पक्का घर बनाना कभी सपने जैसा था। छह लोग, एक कच्चा मकान – जहाँ बारिश का एक बूंद भी भेदी दिखता था। बीते सालों में उन्होंने सीलन भरी दीवारों और टपकती छत के नीचे ही जिंदगी गुजार दी।
लेकिन अब... मसूराम के चेहरे पर वो चिंता नहीं है, जो पहले हुआ करती थी।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मिली मदद ने मसूराम के परिवार को न केवल एक मजबूत छत दी, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई जमीन दी। अब वो बारिश, आंधी या धूप से बेफिक्र होकर रातों की नींद सोते हैं।
और सबसे अच्छी बात? मसूराम को यकीन था कि ये घर उनकी पूरी जिंदगी काफी है, लेकिन बेटे-बहू और दो नातियों को देखते हुए उन्होंने अपनी जेब की बचत से घर में दो कमरे और बना डाले। हाँ, आपने सही पढ़ा। अब उनके घर में हर सदस्य के लिए जगह है, हर चेहरे पर खुशी है।
"पहले डर लगता था कि कहीं छत न गिर जाए। अब तो मन में सुकून है। अपने पैसे से दो कमरे और बना दिए, ताकि बच्चों को भी अच्छी जिंदगी मिल सके," – ये कहते हुए मसूराम की आँखों में वो चमक थी, जो किसी भी योजना की सफलता की सबसे बड़ी पहचान है।
