बचेली में स्वच्छता अभियान दम तोड़ता नजर आया
सुलभ शौचालयों पर ताले, गंदगी से बेहाल वार्डवासी — प्रशासनिक दावों की खुली पोल
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| बचेली। नगर के सुलभ शौचालय पर लटका ताला। |
नगर के कई वार्डों में बने सुलभ शौचालय खुद बदहाली का शिकार हैं और आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है।
🚽 किन वार्डों में है समस्या?
वार्ड क्रमांक 17, 5, 12 और 7 में बने सार्वजनिक शौचालयों पर ताले लटके मिले। जिन सुविधाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को राहत देना था, वे अब शोपीस बनकर रह गई हैं।
मौके पर न तो कोई कर्मचारी मौजूद था और न ही साफ-सफाई की कोई व्यवस्था दिखाई दी।
😷 नागरिक परेशान – क्या कहते हैं लोग?
स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालयों की हालत बेहद खराब हो चुकी है:
पाइपलाइन जाम है
चारों ओर गंदगी फैली हुई है
बदबू के कारण आसपास खड़ा होना तक मुश्किल
लोगों का कहना है कि नगर में स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है।
🎭 प्रशासन के दावे – महज दिखावा?
हाल ही में प्रशासन द्वारा कुछ स्थानों पर सफाई अभियान चलाया गया, लेकिन नागरिक इसे महज औपचारिकता और दिखावा बता रहे हैं।
उनका सवाल है:
"जब सार्वजनिक शौचालय ही बंद पड़े हों और सफाई व्यवस्था ठप हो, तो आखिर स्वच्छता अभियान का लाभ किसे मिल रहा है?"
वार्डवासियों में इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन किया जाएगा।
🗣️ नेताओं का क्या कहना है?
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष मनोज साहा और कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र ने प्रशासन पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी फाइलों और रिपोर्टों में दिखाई दे रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
🧠 विशेषज्ञ की राय
विशेषज्ञों का मानना है:
"किसी भी स्वच्छता अभियान की सफलता केवल निर्माण कार्यों से तय नहीं होती, बल्कि नियमित रखरखाव, निगरानी और जवाबदेही से होती है।"
यदि व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग न हो, तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सुविधाएं भी बेकार साबित हो जाती हैं।

