प्रशासन की निष्क्रियता और जनप्रतिनिधियों का मौन बन रहा जनता के लिए खतरा
यह पुलिया मामला प्रशासन की निष्क्रियता, विभागों के बीच तालमेल की कमी और जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये को बखूबी दर्शाता है।
📅 नवंबर 2025: जर्जर पुलिया – दुर्घटनाओं का जोन
पिछले साल नवंबर में यह पुलिया "एक्सीडेंट जोन" में तब्दील हो चुका था। स्थिति थी:
गड्ढों का अंबार: पुलिया पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, जिससे वाहन चलाना मुहाल।
सुरक्षा संकट: आए दिन हो रही छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं, लोग घायल।
PWD पर आरोप: स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को कई बार सूचित किया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जनप्रतिनिधि मौन: पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष उस्मान खान ने तत्काल निर्माण की मांग की, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का मौन बना रहा।
तब PWD की सहायक इंजीनियर यात्री राय ने बताया था कि सर्वे हो चुका है और जल्द काम शुरू होगा। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।
📅 फरवरी 2026: बिना सूचना तोड़ा पुल → पेयजल संकट
नया साल आया, और प्रशासन ने "एक्शन" लेने का मन बनाया, लेकिन पूरी तरह से बिना सोचे-समझे।
मनमानी शुरू: फरवरी 2026 में PWD ने बिना नगर पालिका को कोई सूचना दिए, पुराने पुलिया को तोड़ना शुरू कर दिया।
बड़ा नुकसान: इस लापरवाही का खामियाजा नल जल योजना को भुगतना पड़ा। पुलिया से जुड़ी पानी की पाइप लाइन कट गई।
गहरा संकट: वार्ड 7 के करीब 35-40 परिवारों की पेयजल सप्लाई ठप हो गई। लोग पानी के लिए भटकने लगे।
अस्थायी राहत: नगर पालिका ने टैंकर से पानी की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन यह महज एक प्लेसबो है। लोगों का रोज का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
🔍 वर्तमान स्थिति: काम अटका, उलझनें बढ़ीं
आज की तारीख तक की स्थिति यह है कि:
निर्माण कार्य स्थगित: पुलिया तोड़ा जा चुका है, लेकिन नए निर्माण की गति बेहद धीमी है। ठेकेदार और PWD के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा है।
पेयजल समस्या जारी: पाइप लाइन की मरम्मत में देरी हो रही है। टैंकर पर निर्भरता आम लोगों के लिए दुखद है।
दुर्घटनाओं का नया खतरा: अब पुलिया न होने से एक खुला गड्ढा जैसी स्थिति बन गई है। यहां से गुजरना दिन-रात जोखिम भरा हो गया है।
जनता की मजबूरी: यह पुलिया पुराना मार्केट और आसपास के कई वार्डों के लिए एकमात्र रास्ता है, जिससे लोगों को गुजरना ही पड़ता है।
🗣️ जनता का आरोप: किसे है फिक्र?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों ही जनता की व्यथा से आंखें मूंदे बैठे हैं।
प्रशासन (PWD): बिना योजना के काम शुरू कर पेयजल संकट दे दिया, फिर काम अटका दिया।
नगर पालिका: हालाँकि उसने टैंकर की व्यवस्था की, लेकिन असली मुद्दा यह है कि PWD ने उसे अनुमति तक नहीं ली। यह विभागों के बीच समन्वय की विफलता है।
जनप्रतिनिधि: स्थानीय विधायक, जिला पंचायत सदस्य या नगर पालिका पार्षद इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन हैं। लोगों की परेशानी को लेकर कोई ठोस पहल नज़र नहीं आ रही है।
📢 जनता की मांग (एक संयुक्त अपील)
प्रभावित नागरिकों और समाचार रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन से साफ मांग है:
तत्काल पेयजल समाधान: सबसे पहले कटी हुई पाइप लाइन की मरम्मत कर पानी की सप्लाई बहाल की जाए।
पुलिया निर्माण की समयसीमा: PWD एक स्पष्ट समयसीमा जारी करे और बिना किसी देरी के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करे।
अस्थायी व्यवस्था: निर्माण अवधि के लिए वहां पर उचित बैरिकेडिंग, लाइट और संकेत लगाए जाएं ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
जनप्रतिनिधि संज्ञान लें: स्थानीय जनप्रतिनिधि तुरंत इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लें और प्रशासन पर दबाव बनाएं।
⚠️ एक चेतावनी : बन सकता है हादसे का कारण
जर्जर पुलिया हो या फिर एक अधूरा निर्माण दोनों ही स्थितियां जनता के लिए समान रूप से घातक हैं। अगर अब भी प्रशासन और जनप्रतिनिधि जागे नहीं, तो यह पुलिया किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। बस्तर संभाग में सड़कों की यह दुर्दशा एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
