नन्ही बच्ची की जान बचाने के लिए मेकॉज और CCSH का बेहतरीन समन्वय, CCSH में सफलतापूर्वक हुआ जटिल MRI
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| CCSH जगदलपुर के रेडियोलॉजी विभाग में लगा MRI मॉनिटर, जिस पर स्कैन की रिपोर्ट एवं ब्रेन की इमेजिंग दिख रही है। |
बच्ची मेडिकल कॉलेज डिमरापाल से रेफर होकर आई थी
शासकीय मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में बच्ची को भर्ती किया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही थी। लेकिन बीमारी की सही वजह का पता लगाने के लिए MRI की जरूरत थी, जो उस समय मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं थी। इसलिए डॉक्टरों ने बच्ची को CCSH रेफर कर दिया, जहां अत्याधुनिक MRI सुविधा उपलब्ध है।
7 अक्टूबर की सुबह आई थी बच्ची, बेसुध हालत में थी
CCSH के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) अजय श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची 7 अक्टूबर की सुबह मेडिकल कॉलेज डिमरापाल से रेफर होकर CCSH आई थी। उस समय बच्ची की हालत गंभीर थी — वह बेसुध हालत में थी और कोई मूवमेंट नहीं था। बच्ची थोड़ी अविकसित भी थी और उसकी उम्र 1 साल से कम थी।
ओपीडी से सीधा MRI में ले जाया गया
अजय श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची को ओपीडी में दिखाने के बाद सीधा MRI में ले जाया गया। चूंकि बच्ची बेसुध हालत में थी और उसमें कोई मूवमेंट नहीं था, इसलिए MRI करने में कोई विशेष परेशानी नहीं आई। पूरी प्रक्रिया में करीब आधा घंटा लगा और एक तकनीशियन ने यह काम बखूबी अंजाम दिया। MRI बिना किसी दुर्घटना या साइड इफेक्ट के आराम से पूरी हो गई।तुरंत मिली स्कैन रिपोर्ट, डॉक्टरों ने की जांच
अजय श्रीवास्तव के अनुसार, MRI पूरा होने के तुरंत बाद स्कैन रिपोर्ट मिल गई। डॉक्टरों ने MRI का गहनता से निरीक्षण किया और रिपोर्ट के आधार पर बीमारी की वजह समझकर उपचार शुरू कर दिया। फिलहाल बच्ची का इलाज जारी है।
सरकारी-निजी समन्वय से मिला जीवनदान
इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बेहतरीन समन्वय से किस तरह गंभीर मरीजों के लिए जीवनदान साबित होने वाली सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती हैं। मेडिकल कॉलेज दिमरापाल के डॉक्टरों ने जहां समय पर बच्ची को रेफर किया, वहीं CCSH की टीम ने बिना देर किए उसका सफल MRI कर बीमारी की जड़ तक पहुंचने में मदद की।

