ISSN: 3139-9959 (Online)

नन्ही बच्ची की जान बचाने के लिए मेकॉज और CCSH का बेहतरीन समन्वय, CCSH में सफलतापूर्वक हुआ जटिल MRI

नन्ही बच्ची की जान बचाने के लिए मेकॉज और CCSH का बेहतरीन समन्वय, CCSH में सफलतापूर्वक हुआ जटिल MRI

CCSH जगदलपुर के रेडियोलॉजी विभाग में लगा MRI मॉनिटर, जिस पर ब्रेन स्कैन की रिपोर्ट एवं इमेजिंग दिख रही है
CCSH जगदलपुर के रेडियोलॉजी विभाग में लगा MRI मॉनिटर, जिस पर स्कैन की रिपोर्ट एवं ब्रेन की इमेजिंग दिख रही है।
जगदलपुर। बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में चिकित्सा जगत का एक ऐसा सराहनीय और जोखिम भरा मामला सामने आया है, जिसने यह साबित कर दिया है कि डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की सूझबूझ से किसी की भी जान बचाई जा सकती है। मामला तोकापाल विकासखंड क्षेत्र का है, जहां एक गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्ची की जान बचाने के लिए शासकीय मेडिकल कॉलेज डिमरापाल और निजी अस्पताल CCSH के डॉक्टरों ने मिलकर एक बड़ा जोखिम उठाया। बच्ची पहले मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में भर्ती थी, जहां से उसे MRI के लिए CCSH रेफर किया गया था।

बच्ची मेडिकल कॉलेज डिमरापाल से रेफर होकर आई थी

शासकीय मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में बच्ची को भर्ती किया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही थी। लेकिन बीमारी की सही वजह का पता लगाने के लिए MRI की जरूरत थी, जो उस समय मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं थी। इसलिए डॉक्टरों ने बच्ची को CCSH रेफर कर दिया, जहां अत्याधुनिक MRI सुविधा उपलब्ध है।

7 अक्टूबर की सुबह आई थी बच्ची, बेसुध हालत में थी

CCSH के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) अजय श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची 7 अक्टूबर की सुबह मेडिकल कॉलेज डिमरापाल से रेफर होकर CCSH आई थी। उस समय बच्ची की हालत गंभीर थी — वह बेसुध हालत में थी और कोई मूवमेंट नहीं था। बच्ची थोड़ी अविकसित भी थी और उसकी उम्र 1 साल से कम थी।

ओपीडी से सीधा MRI में ले जाया गया

CCSH जगदलपुर के रेडियोलॉजी विभाग की टीम — सीनियर रेडियोलॉजी टेक्नीशियन कुमार सुमीत, प्रशांत सिंह, संगीता पात्र, दीपिका पटनायक एवं दीप्तिप्रभा मोहंती MRI मॉनिटर के सामने
CCSH जगदलपुर के रेडियोलॉजी विभाग की टीम — सीनियर रेडियोलॉजी टेक्नीशियन कुमार सुमीत, प्रशांत सिंह, संगीता पात्र, दीपिका पटनायक एवं दीप्तिप्रभा मोहंती MRI मॉनिटर के सामने। इसी टीम ने तोकापाल की गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्ची का जटिल MRI बिना किसी दुर्घटना के सफलतापूर्वक पूरा किया।
अजय श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची को ओपीडी में दिखाने के बाद सीधा MRI में ले जाया गया। चूंकि बच्ची बेसुध हालत में थी और उसमें कोई मूवमेंट नहीं था, इसलिए MRI करने में कोई विशेष परेशानी नहीं आई। पूरी प्रक्रिया में करीब आधा घंटा लगा और एक तकनीशियन ने यह काम बखूबी अंजाम दिया। MRI बिना किसी दुर्घटना या साइड इफेक्ट के आराम से पूरी हो गई।

तुरंत मिली स्कैन रिपोर्ट, डॉक्टरों ने की जांच

अजय श्रीवास्तव के अनुसार, MRI पूरा होने के तुरंत बाद स्कैन रिपोर्ट मिल गई। डॉक्टरों ने MRI का गहनता से निरीक्षण किया और रिपोर्ट के आधार पर बीमारी की वजह समझकर उपचार शुरू कर दिया। फिलहाल बच्ची का इलाज जारी है।

सरकारी-निजी समन्वय से मिला जीवनदान

इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बेहतरीन समन्वय से किस तरह गंभीर मरीजों के लिए जीवनदान साबित होने वाली सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती हैं। मेडिकल कॉलेज दिमरापाल के डॉक्टरों ने जहां समय पर बच्ची को रेफर किया, वहीं CCSH की टीम ने बिना देर किए उसका सफल MRI कर बीमारी की जड़ तक पहुंचने में मदद की।


basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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