संग्रहालय के नए भवन में डिजाइन बदलाव पर सवाल, ऑडिटोरियम की ऊंचाई में भारी अंतर

मानव विज्ञान संग्रहालय के ऑडिटोरियम निर्माण पर सवाल, प्रस्तावित डिजाइन में बदलाव की चर्चा

जगदलपुर मानव विज्ञान संग्रहालय का मुख्य प्रवेश द्वार
जगदलपुर स्थित मानव विज्ञान संग्रहालय का मुख्य प्रवेश द्वार।
जगदलपुर। बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजने वाले मानव विज्ञान संग्रहालय के नए भवन में बन रहे ऑडिटोरियम के निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुराने भवन को तोड़कर नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन ऑडिटोरियम से जुड़े निर्माण में प्रस्तावित डिजाइन और मौके पर किए जा रहे काम में अंतर होने की जानकारी सामने आई है।

संग्रहालय से जुड़े एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि ऑडिटोरियम सहित नए भवन की योजना तैयार करते समय इसकी ऊंचाई और अन्य संरचनाओं को लेकर प्रावधान किए गए थे। वर्तमान निर्माण में इन प्रावधानों में बदलाव किए जाने की बात सामने आई है।

अधिकारी के अनुसार प्रस्ताव में ऑडिटोरियम की ऊंचाई करीब 38.11 से 40 फीट के आसपास बताई गई थी, जबकि वर्तमान निर्माण में करीब 14-15 फीट के स्तर पर स्लैब डाले जाने की स्थिति है। बाद में ऊंचाई बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा है तो सवाल यह है कि मूल डिजाइन में बदलाव की तकनीकी स्वीकृति किस स्तर पर ली गई और इससे निर्माण की लागत पर क्या असर पड़ेगा।

प्रवेश द्वार और सुविधाओं में भी बदलाव की जानकारी

मानव विज्ञान संग्रहालय में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम
मानव विज्ञान संग्रहालय में चल रहे ऑडिटोरियम भवन निर्माण कार्य पर सवाल उठ रहे हैं।

ऑडिटोरियम से संबंधित निर्माण में मुख्य प्रवेश द्वार की चौड़ाई को लेकर भी बदलाव की जानकारी सामने आई है। प्रस्ताव में प्रवेश द्वार करीब 25 फीट का होने की बात बताई गई थी, जबकि मौके पर इसे करीब 18 फीट किए जाने की जानकारी मिली है।

इसी तरह दो बाथरूम के प्रावधान की तुलना में मौके पर एक ही बाथरूम बनाए जाने की बात अधिकारी ने बताई है। ऑडिटोरियम की ऊंचाई और अन्य संरचनात्मक बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि इन बदलावों की तकनीकी स्वीकृति हुई है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए मूल स्वीकृत नक्शे, तकनीकी स्वीकृति और संशोधित ड्राइंग की जांच आवश्यक होगी।

एक हिस्से में बदलाव, तो पूरी योजना की जांच जरूरी

ऑडिटोरियम भवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यहां प्रस्तावित डिजाइन में बदलाव की जानकारी सामने आने के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या नए भवन के अन्य हिस्सों में भी मूल प्रस्ताव और वर्तमान निर्माण के बीच कोई अंतर है?

फिलहाल इस संबंध में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। लेकिन ऑडिटोरियम में बताए जा रहे बदलावों के बाद पूरे निर्माण की स्वीकृत ड्राइंग और मौके की स्थिति का तकनीकी मिलान कराया जाना जरूरी दिखाई देता है।

नए भवन का कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल करीब 9960.71 वर्गफुट बताया गया है। ऐसे में भवन के प्रत्येक प्रमुख हिस्से के निर्माण की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुराने भवन को तोड़कर नया निर्माण

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि पुराना भवन काफी पुराना होने के कारण मरम्मत योग्य था या उसकी तकनीकी स्थिति ऐसी थी कि नए भवन का निर्माण आवश्यक हो गया। बताया गया है कि पुराने भवन में मरम्मत की जरूरत थी, लेकिन इसके स्थान पर नए भवन का प्रस्ताव तैयार किया गया और अब पुराने भवन को तोड़कर नया निर्माण कराया जा रहा है।

मानव विज्ञान संग्रहालय बस्तर की संस्कृति और जनजातीय विरासत को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए नए भवन में बनने वाले ऑडिटोरियम समेत पूरी संरचना की गुणवत्ता और स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप निर्माण होना महत्वपूर्ण है।

निर्माण की निगरानी पर भी सवाल

निर्माण कार्य आरके बिल्डर, रायपुर से संबंधित होने की जानकारी सामने आई है। निर्माण की निगरानी के लिए इंजीनियरिंग अमले की व्यवस्था होने की बात कही गई है, लेकिन मौके पर प्रोजेक्ट मैनेजर और इंजीनियरों की नियमित मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्वीकृत नक्शे से मिलान के बाद स्थिति होगी स्पष्ट

ऑडिटोरियम को लेकर सामने आई जानकारी की वास्तविक स्थिति स्वीकृत नक्शे, तकनीकी स्वीकृति, मूल अनुमान, कार्यादेश तथा किसी संशोधित ड्राइंग या संशोधित अनुमान से ही स्पष्ट हो सकेगी।

यदि मूल स्वीकृत डिजाइन और वर्तमान निर्माण में अंतर है तो संबंधित विभाग को यह बताना होगा कि बदलाव कब, किसके अनुमोदन से और किन तकनीकी कारणों से किए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बदलाव से परियोजना की लागत और उपयोगिता पर कोई प्रभाव पड़ रहा है या नहीं।

इन बिंदुओं पर संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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