सैकड़ों ग्रामीणों की रैली मांझीपारा से खेल मैदान तक, पेसा अधिनियम उल्लंघन के लगाए आरोप
भानपुरी / बस्तर (12जून 2026)। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व में बस्तर जिले के ग्राम पंचायत चपका में प्रस्तावित निजी क्षेत्र के आयरन उद्योग की स्थापना पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया गया। राज्यपाल के नाम बस्तर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।
सैकड़ों ग्रामीणों की रैली
कार्यक्रम की शुरुआत चपका से बस्तर नगर पंचायत स्थित मांझीपारा से एक विशाल रैली के साथ हुई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समाज के लोग रैली में शामिल हुए। यह रैली लाल बहादुर शास्त्री खेल मैदान पहुंची, जहां एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। सभा के बाद प्रदर्शनकारी तहसीलदार के कार्यालय पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम का उल्लंघन
संगठन ने आरोप लगाया कि उद्योग की स्थापना में संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम 1996 के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा है। ज्ञापन के अनुसार, यह क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र घोषित है, जहां बिना ग्राम सभा की सहमति के औद्योगिक स्थापना अमान्य है।
भूमि कब्जा और प्रकरण वापसी की मांग
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
भूमि पर अतिक्रमण: मैसर्स गोपाल स्पंज एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चपका ग्राम में भूमिहीन कृषकों को आबंटित खसरा नंबर 162/01 से 162/28 (कुल 16.37 हेक्टेयर) कृषि भूमि पर अनधिकृत कब्जा कर पक्की चारदीवारी बनाकर किसानों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। मांग है कि सीमांकन कर कब्जा दिलाया जाए।
आपराधिक प्रकरण वापस:
12 अप्रैल 2021 (कोविड काल, धारा 144) के दौरान उद्योग के खिलाफ पर्यावरणीय जनसुनवाई में असहमति जताने पर 164 ग्रामीणों पर दायर प्रकरण।
10 अप्रैल 2026 को चोड़साड़ वार्षिक डंडजात्रा के दौरान चपका के 8 प्रमुखों के खिलाफ दर्ज प्रकरण तत्काल वापस लिया जाए।
सांस्कृतिक धरोहर बचाई जाए: ग्राम चपका मार्कन्डे नदी तट पर बसा एक पवित्र सांस्कृतिक-धार्मिक धरोहर स्थल है, जिसे आदिवासियों की आस्था के अनुरूप संरक्षित किया जाए।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की गुहार
संगठन ने संविधान की धारा 244(1) के तहत पांचवीं अनुसूची में राज्यपाल को प्रदत्त विशेष अधिकारों का हवाला देते हुए मांग की कि चपका में प्रस्तावित औद्योगिक स्थापना पर तत्काल रोक लगाई जाए।
इन नेताओं ने किया नेतृत्व
इस आंदोलन में सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख लोग शामिल थे:
अरविंद नेताम (संरक्षक)
राजा राम तोडेम (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष)
दसरथ कश्यप (जिला अध्यक्ष)
सकुंतला कश्यप (जिला पंचायत सदस्य)
कौशल नागवंशी, सोनसाय कश्यप, रमेश कश्यप, नकछेढी कश्यप, चनदरु बघेल, रती राम कश्यप
लखेश्वर कश्यप (अध्यक्ष, इंद्रावती बचाओ संघर्ष समिति)
इसके अलावा गोपाल स्पंज आयरन संयंत्र विरोध संघर्ष समिति से जुड़े चपका, सोनारपाल सहित 12 ग्रामों के बड़ी संख्या में आदिवासी उपस्थित रहे।
