बस्तर पुलिस में 3.40 करोड़ का वेतन घोटाला, महीनों तक अफसरों को भनक नहीं | समग्र विश्व

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बस्तर पुलिस में 3.40 करोड़ का वेतन घोटाला, तीन आरोपी गिरफ्तार

आरक्षक गिरीश राय ने डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर भत्तों में मैनिपुलेशन किया — PHQ की जांच में हुआ खुलासा
समग्र विश्व 📅 01 जुलाई 2026 अपडेटेड: 01 जुलाई 2026

जगदलपुर | बस्तर जिले के पुलिस विभाग में एक बड़ा वेतन घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। वेतन शाखा में तैनात तीन कर्मचारियों पर 3 करोड़ 40 लाख रुपये की सरकारी राशि के गबन का आरोप है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

🔍 कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?

मामला जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय, जगदलपुर के वेतन शाखा का है। अपराध अन्वेषण शाखा मुख्यालय जगदलपुर की उप पुलिस अधीक्षक सुसंता लकड़ा की लिखित शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ नामजद अपराध दर्ज किया।

जांच में पता चला कि वेतन शाखा में पदस्थ आरक्षक गिरीश राय, राजकुमार कतलम और  हेमंत मैथ्यू ने मिलकर यह कथित अपराध किया।

⚡ खामी: मैनुअल सिस्टम

आरक्षक गिरीश राय करीब 9 साल से नौकरी कर रहा था। आरक्षक होने के बावजूद उसे एसपी ऑफिस के वेतन शाखा में सहायक बनाया गया था। उसने देखा कि पुलिसकर्मियों को दर्जनों भत्ते मिलते हैं, जिनकी रकम पद, समय और रैंक के हिसाब से बदलती रहती है। सबसे बड़ी खामी यह थी कि यह काम मैन्युअल होता था, जिससे उसे खेलने का मौका मिला।

शुरुआत में आरोपी गिरीश राय ने छोटी रकम से हेराफेरी की। धीरे-धीरे उसका हौसला बढ़ता गया और वह बड़े पैमाने पर खेल करने लगा। उसने विभाग के अलग-अलग कर्मचारियों के नाम पर भत्तों की रकम को मैनिपुलेट करना शुरू कर दिया। जब भी कोई अधिकारी हिसाब मांगता, तो वह कंप्यूटर पर रकम एडिट करके दिखा देता था।

“महीनों तक यह कार्यक्रम चलता रहा, लेकिन अफसरों को भनक तक नहीं लगी?”

लगातार महीनों तक यह हेराफेरी चलती रही — लेकिन किसी वरिष्ठ अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी। महीनों तक ऑडिट में भी हिसाब ठीक मिलता रहा, क्योंकि आरोपी डिजिटल रिकॉर्ड में फेरबदल करने में माहिर हो गया था। यही वजह रही कि इतने लंबे समय तक यह खेल चलता रहा। अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों महीनों तक किसी को इसकी भनक नहीं लगी? क्या वित्तीय प्रक्रियाओं में कोई बड़ी चूक थी या फिर जानबूझकर आँखें मूँदी गईं?

💰 कहाँ गई गबन की रकम?

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गबन की राशि का मास्टरमाइंड आरोपी गिरीश राय शेयर मार्केट और इंट्रा-डे ट्रेडिंग में लगा रहा था। सूत्रों के अनुसार, उसे इन ट्रेडिंग में लगातार नुकसान हो रहा था, जिसके चलते वह और अधिक रकम जुटाने के लिए यह कथित अपराध करता रहा।

इसके अलावा, सुनाई में आया है कि इस रकम के एक बड़े हिस्से को उसने जगदलपुर के प्राइम लोकेशन पर एक मल्टी-शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने में लगाया है। फिलहाल पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस निर्माण में और भी कोई शामिल तो नहीं है।

🔎 PHQ की जांच ने खोला राज

इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब रायपुर की पुलिस मुख्यालय (PHQ) फाइनेंस शाखा ने बस्तर एसपी कार्यालय के वेतन भत्तों और खर्चों में असामान्य वृद्धि देखी। मुख्यालय की टीम ने जब गहराई से जांच की और 10 साल के डेटा का विश्लेषण किया, तो उन्होंने पाया कि बस्तर पुलिस के विशिष्ट मदों में खर्च 1000 गुना बढ़ गया था।

इसके बाद PHQ की टीम तुरंत जगदलपुर पहुंची और पूरे मामले की बारीकी से जांच की। जांच में सभी तथ्य सामने आने के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

🏦 कैसे होगी रकम की रिकवरी?

📌 रिकवरी की संभावित प्रक्रिया

  • संपत्ति कुर्की: आरोपियों की चल-अचल संपत्ति (मल्टी-शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बैंक बैलेंस, शेयर) को कुर्क किया जा सकता है।
  • बैंक खातों की जांच: सभी आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की गहन जांच की जाएगी।

स्थानीय अधिकारियों की भूमिका: जिला कलेक्टर, एसपी बस्तर, और स्थानीय राजस्व विभाग रिकवरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

🏛️ प्रशासन में खलबली

इस मामले ने डिजिटल हस्ताक्षरों की सुरक्षा और वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

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basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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