डाइट बस्तर के प्राचार्य नीतिन डडसेना ने कहा - AI साधन है, बच्चों को स्वयं सोचने के लिए प्रेरित करना जरूरी
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| डाइट बस्तर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मेंटार सुभाष श्रीवास्तव बच्चों को AI के सीमित उपयोग और सृजनात्मकता के महत्व पर उदबोधन देते हुए। पीछे बैंच पर छात्र मौजूद। (तस्वीर: डाइट बस्तर) |
सर्वे में क्या हुआ?
डाइट बस्तर ने करीब 100 बच्चों को एक सरल सा कार्य दिया – अपने नाम के पहले अक्षर से जितनी हो सके, उतनी आकृतियाँ बनाएँ। आश्चर्यजनक रूप से, केवल 1-2 बच्चे ही कुछ आकृतियाँ बना पाए। अधिकांश ने असमंजस में पूछा – “सर, समझ में नहीं आया।”
डाइट बस्तर के प्राचार्य ने क्या कहा?
डाइट बस्तर के प्राचार्य नीतिन डडसेना ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा,
“AI एक साधन मात्र है, लेकिन इसकी अत्यधिक निर्भरता बच्चों की सोचने और सृजन करने की क्षमता को सीमित कर रही है। डाइट बस्तर का यह प्रयास है कि हम इस ओर ध्यान दिलाएँ।”
मेंटार का बयान
इस कार्यक्रम के मेंटार सुभाष श्रीवास्तव ने बताया कि यह परिणाम भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि बच्चे अब स्वयं मस्तिष्क का उपयोग करने की बजाय तुरंत AI से उत्तर ढूँढने लगे हैं।
कल से दो दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन
इसी कड़ी में, डाइट बस्तर अब एक और बड़ा कदम उठा रहा है। कल यानी बुधवार से दो दिवसीय टीचिंग लर्निंग मटेरियल और कला शिक्षण पर वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।
इस वर्कशॉप के मेंटार सुभाष श्रीवास्तव होंगे। यह कार्यशाला शिक्षकों और अभिभावकों को प्रशिक्षित करेगी कि कैसे बच्चों को AI पर निर्भर हुए बिना सृजनात्मक बनाया जाए।
यह सिर्फ एक सर्वे नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक जागरूकता अलर्ट है। अगर समय रहते नहीं सुधारे गए, तो आने वाली पीढ़ी केवल जानकारी की उपभोक्ता बनेगी, निर्माता नहीं।
