राज्योत्सव में वन विभाग की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र! मंत्री केदार कश्यप ने चखा कोदो का बिस्कुट, बांस शिल्प पर कहा- वाह
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| राज्योत्सव स्थल पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी का निरीक्षण करते मंत्री केदार कश्यप, साथ में वनोपज उत्पादों की जानकारी लेते अधिकारी। |
राज्योत्सव के दूसरे दिन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने विभागीय स्टॉल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वनोपजों से बने उत्पादों को चखा और उत्पादन-प्रसंस्करण को लेकर वन धन विकास केंद्र के समिति सदस्यों से जानकारी भी ली।
चेंदरू द्वार की तर्ज पर बना प्रदर्शनी का मुख्य द्वार
विभागीय प्रदर्शनी का मुख्य द्वार इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर के प्रसिद्ध चेंदरू द्वार की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें बस्तर के आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की मित्रता को दर्शाया गया है, जो मानव और वन्यजीव के सह-अस्तित्व का प्रतीक है।
मंत्री श्री कश्यप ने वनोपजों से बनी औषधियों के बारे में समिति और विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने लहसुन व अन्य वनोपज औषधियों से बनी सिरदर्द की दवा को सूंघकर भी देखा। उन्होंने कोदो से बने बिस्कुट का स्वाद चखा और इसकी सराहना की।
आत्मसमर्पित महिलाओं से की चर्चा
मंत्री कश्यप ने उन आत्मसमर्पित महिलाओं से भी चर्चा की, जो कभी नक्सलवाद से जुड़ी थीं, लेकिन अब वन धन विकास केंद्रों से जुड़कर मुख्यधारा में काम कर रही हैं। यह पहल सामाजिक और आर्थिक बदलाव का बेहतरीन उदाहरण है।
'संवरता छत्तीसगढ़' थीम और पौधरोपण की उपलब्धियां
राज्योत्सव के दौरान वन विभाग की ओर से 'संवरता छत्तीसगढ़' थीम के अंतर्गत 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की उपलब्धियां प्रदर्शित की गई हैं।
वर्ष 2024 में लक्ष्य से 140 प्रतिशत अधिक 3.50 करोड़ पौधे रोपे गए।
वर्ष 2025 में लक्ष्य से 215 प्रतिशत अधिक 3.55 करोड़ पौधे रोपे गए।
किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने अपनी 62,441 एकड़ निजी भूमि पर 3.67 करोड़ पौधे लगाए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी बने हैं।
'बदलता बस्तर' पैनल में दिखा बदलाव
'बदलता बस्तर' पैनल में क्षेत्र में आए बदलाव और आजीविका संवर्धन के प्रयासों को दर्शाया गया है। इसके तहत:
572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है।
मनरेगा के माध्यम से 21.67 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है।
वनोपज संग्रहण से ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है।
कांकेर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 35 जिप्सियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है।
बांस शिल्प और हर्बल उत्पादों की धूम
संयुक्त वन प्रबंधन एवं रोजगार स्टॉल पर बांस से बने घर, नाव, मछली, लालटेन, मंदिर, फूलदान और सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। ये उत्पाद ग्रामीण कारीगरों की कला और कौशल को सामने लाते हैं। वन धन केंद्रों में तैयार शहद, आंवला और अन्य उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
औषधीय पादप बोर्ड की 'घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का रोपण' योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आय के अवसरों से जोड़ने की जानकारी दी जा रही है। बोर्ड के अनुसार बाड़ी में सिंगी और सतावर जैसे पौधे लगाकर महिलाएं सालाना 20 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकती हैं और इसका लाभ 20 वर्षों तक मिल सकता है। धमतरी जिले के 27 गांवों में पायलट परियोजना के तहत 1.21 लाख पौधे लगाए गए हैं।
हर्बल उत्पादों की भरमार
छत्तीसगढ़ हर्बल्स स्टॉल पर सफेद मूसली चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, आंवलकी चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू, महाभृंगराज तेल और एलोवेरा साबुन जैसे उत्पाद प्रदर्शित हैं। कांगेर घाटी, तीरथगढ़ जलप्रपात और ग्रामीण तालाब के मॉडल भी दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।
आम लोगों ने की सराहना
प्रदर्शनी देखने पहुंचे ग्राम मरोद के त्रिवेंद्र साहू और रवि निर्मलकर ने कहा कि वन विभाग की प्रदर्शनी देखकर लगा, जैसे पूरे छत्तीसगढ़ का जंगल एक ही जगह सिमट आया हो। बांस की कलाकृतियां, औषधीय पौधों की जानकारी और हर्बल उत्पाद बहुत उपयोगी हैं। उन्होंने जंगलों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की पहल को सराहनीय बताया।
