📚 मां बनीं तो सपने नहीं छोड़े: गीदम की महिलाओं ने दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर दी साक्षरता परीक्षा

मां बनीं तो सपने नहीं छोड़े: गीदम की महिलाओं ने दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर दी साक्षरता परीक्षा

📚 मां बनीं तो सपने नहीं छोड़े: गीदम की महिलाओं ने दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर दी साक्षरता परीक्षा

नक्सली पुनर्वास केंद्र के असाक्षरों ने भी दी परीक्षा | आरती-तिलक से हुआ स्वागत

गीदम (दंतेवाड़ा), 28 सितंबर 2026 |

यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी। यह उस हौसले की कहानी है, जिसने मां बनने के बाद भी पढ़ने का सपना नहीं छोड़ा। गीदम विकासखंड में 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत आयोजित महापरीक्षा में जब एक के बाद एक महिलाएं अपने दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर परीक्षा केंद्र में पहुंचीं, तो पूरा माहौल भावुक हो उठा।

गीदम विकासखंड में 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' की महापरीक्षा में दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर पर्चा हल करती महिला शिक्षार्थी

गीदम में 'उल्लास महापरीक्षा' के दौरान दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर पर्चा हल करतीं महिला शिक्षार्थी।

👶 "बच्चा सो रहा था, तो मैंने पर्चा हल कर लिया"

परीक्षा केंद्र पर पहुंचीं सुनीता (बदला हुआ नाम) का कहना है — "शादी के बाद पढ़ाई छूट गई थी। बच्चा हुआ तो लगा कि अब क्या पढ़ेंगी। लेकिन जब गांव में साक्षरता केंद्र खुला, तो लगा कि एक बार फिर कोशिश करूं। आज बच्चा सो रहा था, तो मैंने पूरा ध्यान लगाकर पर्चा हल कर लिया।"

यह सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं है। गीदम के कई साक्षरता केंद्रों पर 15 से अधिक महिलाएं अपने नन्हे बच्चों के साथ परीक्षा देने पहुंचीं। किसी ने बच्चे को गोद में लिया, किसी ने कंधे पर झोला टांगा, और किसी ने बच्चे को साथ बैठाकर पर्चा हल किया।

✨ इस खबर की 5 खास बातें

  • 👶 15+ महिलाएं दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर परीक्षा में शामिल
  • 🎯 नक्सली पुनर्वास केंद्र के असाक्षरों ने भी दी परीक्षा
  • 🌸 आरती-तिलक से हुआ नवसाक्षरों का आत्मीय स्वागत
  • 👮 BEO भवानी पुनेम एवं BRC नितेश सिंह ने किया सघन निरीक्षण
  • 🤝 स्वयंसेवी शिक्षकों ने निभाई सराहनीय भूमिका
गीदम स्थित नक्सली पुनर्वास केंद्र में निवासरत असाक्षर शिक्षार्थी 'उल्लास महापरीक्षा' में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए

गीदम स्थित नक्सली पुनर्वास केंद्र में निवासरत असाक्षरों ने 'उल्लास महापरीक्षा' में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

🖊️ बंदूक छोड़ कलम थामा: नक्सली पुनर्वास केंद्र के असाक्षरों ने भी दी परीक्षा

इस बार महापरीक्षा की एक और खास बात रही — गीदम स्थित नक्सली पुनर्वास केंद्र में निवासरत असाक्षरों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बंदूक छोड़ कलम थामने वाले इन शिक्षार्थियों ने यह साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत कभी देर से नहीं होती।

🌸 आरती-तिलक से हुआ आत्मीय स्वागत

परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे नवसाक्षरों का भारतीय परंपरा के अनुसार आरती उतारकर और रोली-तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। यह दृश्य देखकर ऐसा लगा जैसे पूरा गांव अपनी बेटियों-बहुओं की सफलता का उत्सव मना रहा हो।

👮 अधिकारियों ने बढ़ाया हौसला

परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए खंड शिक्षा अधिकारी सुश्री भवानी पुनेम एवं खंड स्रोत समन्वयक  नितेश सिंह ने विभिन्न केंद्रों का सघन निरीक्षण किया। अधिकारियों ने न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि परीक्षार्थियों से बातचीत कर उनका उत्साह भी बढ़ाया। निरीक्षण के दौरान सभी केंद्रों पर केंद्राध्यक्ष एवं केंद्र प्रभारी पूरी मुस्तैदी से तैनात रहे। इस पूरे महाभियान को सफल बनाने में स्वयंसेवी शिक्षकों ने अत्यंत सराहनीय भूमिका निभाई।

💬 "पढ़ना अब जीवन का हिस्सा बन गया है"

परीक्षा देने के बाद जब महिलाओं से पूछा गया कि आगे क्या करेंगी, तो जवाब था — "पढ़ना अब जीवन का हिस्सा बन गया है।" किसी ने कहा कि अब बच्चों को खुद पढ़ाएंगी, तो किसी ने कहा कि आगे की कक्षा में दाखिला लेंगी।

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basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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